खिताब बचाने उतरेगी टीम इंडिया, दिग्गजों की अलग-अलग राय
आगामी 2026 टी-20 विश्व कप को लेकर क्रिकेट जगत में रणनीतियों और भविष्यवाणियों का दौर शुरू हो चुका है। 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेले जाने वाले इस 20-टीमों के मेगा इवेंट में ‘मेन इन ब्लू’ अपना खिताब बचाने के प्रबल इरादे से मैदान में उतरेगी। भारतीय टीम अभी से काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी की राय कुछ अलग है। उनका मानना है कि 2024 की उपविजेता रही दक्षिण अफ्रीका इस बार फाइनल में भारत को मात देकर अपने पहले व्हाइट-बॉल विश्व कप का सूखा खत्म कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि गिलेस्पी के पूर्व ऑस्ट्रेलियाई साथी ग्लेन मैकग्रा भी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच फाइनल मुकाबले की भविष्यवाणी कर रहे हैं। हालांकि, मैकग्रा उलटफेर की संभावनाओं को स्वीकार करने के बावजूद जीत के लिए भारत पर ही दांव लगा रहे हैं। दूसरी तरफ, पूर्व कंगारू पेसर डेमियन फ्लेमिंग पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि टीम इंडिया अपनी ट्रॉफी सुरक्षित रखेगी। फ्लेमिंग के मुताबिक, अभिषेक शर्मा इस टूर्नामेंट के सबसे हावी होने वाले बल्लेबाज साबित हो सकते हैं और गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की धार के साथ स्पिन के कई विकल्प भारत को अजेय बनाते हैं।
ग्रुप समीकरण और दोनों टीमों की ताकत
टूर्नामेंट के तय प्रारूप के अनुसार, भारतीय टीम को अपेक्षाकृत आसान माने जा रहे ‘ग्रुप ए’ में पाकिस्तान, नामीबिया, नीदरलैंड्स और अमेरिका के साथ रखा गया है। इसके विपरीत दक्षिण अफ्रीका को ‘ग्रुप डी’ जैसी कठिन चुनौती मिली है, जहां उसे न्यूज़ीलैंड, अफगानिस्तान, कनाडा और यूएई का सामना करना है। इन चारों ग्रुप्स में से शीर्ष दो टीमें सुपर-8 में अपनी जगह पक्की करेंगी। भारतीय स्क्वॉड की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में सौंपी गई है, जिसमें अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, संजू सैमसन, शिवम दुबे, इशान किशन, हार्दिक पंड्या, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर और रिंकू सिंह जैसे मैच विनर शामिल हैं। वहीं, दक्षिण अफ्रीका का नेतृत्व एडन मार्कराम करेंगे। उनके साथ क्विंटन डी कॉक, टोनी डी जोरजी, डेवाल्ड ब्रेविस, डेविड मिलर, डोनोवन फरेरा, मार्को जानसेन, केशव महाराज, कगिसो रबाडा, क्वेना मफाका, लुंगी एनगिडी, जेसन स्मिथ, जॉर्ज लिंडे, कॉर्बिन बॉश और एनरिक नॉर्टजे जैसे दमदार खिलाड़ी मौजूद हैं।
बड़े मंच का दबाव और मिलर की भारी चूक
भले ही दक्षिण अफ्रीका को विश्व कप जीतने का प्रबल दावेदार बताया जा रहा हो, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में उनके खिलाड़ियों का दबाव झेलना हमेशा से बहस का विषय रहा है। इसका एक जीता-जागता उदाहरण हाल ही में अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच हुए आईपीएल 2026 के मुकाबले में देखने को मिला। इस रोमांचक मैच में दिल्ली को आखिरी दो गेंदों पर जीत के लिए महज दो रनों की दरकार थी। क्रीज पर शानदार फॉर्म में चल रहे दक्षिण अफ्रीकी स्टार डेविड मिलर मौजूद थे। उन्होंने स्ट्राइक रोटेट करने से साफ इनकार कर दिया और दूसरे छोर पर खड़े कुलदीप यादव को रन लेने से रोक दिया।
‘हीरो बनने की चाह’ और दिग्गजों में मतभेद
मिलर का खुद पर यह अति-आत्मविश्वास उनकी टीम को बहुत भारी पड़ा। प्रसिद्ध कृष्णा ने चालाकी दिखाते हुए एक धीमी बाउंसर फेंकी जिस पर मिलर पूरी तरह चकमा खा गए। दोनों बल्लेबाजों ने बाई का रन चुराने की कोशिश जरूर की, लेकिन जोस बटलर के सटीक थ्रो ने स्ट्राइकर एंड पर गिल्लियां बिखेर दीं और गुजरात ने एक रन से यह मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस वाकये ने क्रिकेट विशेषज्ञों को दो अलग-अलग धड़ों में बांट दिया। भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने मिलर के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि उनके जीतने के इरादे पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। इसके ठीक उलट, हरभजन सिंह ने अपने यूट्यूब चैनल पर मिलर के इस फैसले की तीखी आलोचना की। हरभजन ने बेबाकी से कहा कि मिलर ने हीरो बनने की कोशिश की और यह मान लिया कि वह आखिरी गेंद पर अकेले दम पर मैच खत्म कर देंगे। उनका यह फैसला इतना गलत साबित हुआ कि ऐसा लगा मानो वह आज भी अपनी पुरानी टीम गुजरात टाइटंस को फायदा पहुंचा रहे हों।
महान और अच्छे खिलाड़ी के बीच का फासला
हरभजन का साफ तर्क था कि कुलदीप यादव इतने भी नौसिखिए बल्लेबाज नहीं हैं कि वह गेंद को बल्ले से न लगा सकें। अगर मिलर ने अपने साथी खिलाड़ी पर थोड़ा भी भरोसा जताया होता और पांचवीं गेंद पर सिंगल ले लिया होता, तो मैच कम से कम सुपर ओवर तक जरूर खिंचता। अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए हरभजन ने कहा कि एक मजबूत और एक महान खिलाड़ी में यही बुनियादी फर्क होता है कि महान खिलाड़ी मैच को अंजाम तक पहुंचाता है। मिलर अपनी इस रणनीतिक गलती के बाद मैदान पर बेहद हताश नजर आए क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म था कि उनके एक गलत फैसले ने टीम के हाथों से जीत छीन ली। इस तरह की महत्वपूर्ण चूक यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या दक्षिण अफ्रीका के ये दिग्गज खिलाड़ी विश्व कप के फाइनल जैसे महामुकाबले में भारत के सामने मानसिक दबाव का सही से सामना कर पाएंगे।